रविवार, मार्च 8, 2026
  • इंग्लिश
  • उर्दू
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
  • करियर
  • विज्ञापन
  • गोपनीयता नीति
इंग्लिश
उर्दू
विज़न मुस्लिम टुडे
  • मुख्य पृष्ठ
  • भारतीय
  • विदेश
  • संपादकीय
  • साक्षात्कार
  • खेल
  • अर्थव्यवस्था
  • फैक्ट चेक
  • शिक्षा
  • सिनेमा
No Result
View All Result
  • मुख्य पृष्ठ
  • भारतीय
  • विदेश
  • संपादकीय
  • साक्षात्कार
  • खेल
  • अर्थव्यवस्था
  • फैक्ट चेक
  • शिक्षा
  • सिनेमा
No Result
View All Result
विज़न मुस्लिम टुडे
No Result
View All Result
Home देश

राम तुम्हारा चरित्र स्वंय ही काव्य है।

Muslim Today by Muslim Today
अप्रैल 13, 2022
in देश
0 0
0
राम तुम्हारा चरित्र स्वंय ही काव्य है।
0
SHARES
510
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ये राम का देश है। यहां कण कण में राम हैं। भाव की हर हिलोर में राम हैं। कर्म के हर छोर में राम हैं। राम यत्र-तत्र हैं। राम सर्वत्र हैं। जिसमें रम गए वही राम है। यहां सबके अपने-अपने राम हैं। गांधी के राम अलग हैं। लोहिया के राम अलग। वाल्मीकि और तुलसी के राम में भी फर्क है। भवभूति के राम दोनों से अलग हैं। कबीर ने राम को जाना। तुलसी ने माना। निराला ने बखाना। राम एक ही हैं पर दृष्टि सबकी भिन्न। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यवत्ता और संयम का नाम है राम। आप ईश्वरवादी न हो, तो भी घर-घर में राम की गहरी व्याप्ति से उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम तो मानना ही पड़ेगा। स्थितप्रज्ञ, असंम्पृम्त, अनासक्त। एक ऐसा लोक नायक, जिसमें सत्ता के प्रति निरासक्ति का भाव है। जो जिस सत्ता का पालक है, उसी को छोड़ने के लिए सदा तैयार है।

राम हमारे देश की उत्तर दक्षिण एकता के अकेले सूत्रधार है। राम अयोध्या के थे। हमारे ज़माने के महान विचारक डॉ राममनोहर लोहिया भी अयोध्या के ही रहने वाले थे। डॉ लोहिया ने हमारे तीन देवताओं को एक लाईन में परिभाषित किया है। उनका कहना है कि राम मर्यादित व्यक्तित्व के स्वामी थे। तो कृष्ण उन्मुक्त और शिव असीमित व्यक्तित्व के स्वामी। राम पूरी तरह धर्म के स्वरूप हैं। जिसे राम प्रिय नही है उसे धर्म प्रिय नही है। कबीर राम को परम ब्रह्म मानते है। “कस्तूरी कुण्डल बले मृग ढूँढे बन माही ऐसे घट घट राम है दुनिया देखे नाहीं “

आख़िर ये राम हैं कौन ? जिनका नाम लेकर एक बूढ़ा गॉधी अंग्रेज़ी साम्राज्य से लड गया। जिसके नाम पर इस देश मे आदर्श शासन की कल्पना की गयी। उसी राम राज्य के सपने को देख देश आज़ाद हुआ।गॉंधी ने यही सपना देखा था। विनोबा इसे प्रेम योग और साम्ययोग के तौर पर देखते थे।वाल्मीकि राम राज्य की व्याख्या करते है।

काले वर्षति पर्जन्य: सुभिक्षंविमला दिश:

ह्रष्टपुष्टजनाकीर्ण पुरू जनपदास्तथा।

नकाले म्रियते कश्चिन व्याधि: प्राणिनां तथा।

नानर्थो विद्यते कश्चिद् पाने राज्यं प्रशासति।

यानी जिस शासन मे बादल समय से बरसते हों। सदा सुभिक्ष रहता हो सभी दिशाएँ निर्मल हो। नगर और जनपद ह्रष्ट पुष्ट मनुष्यों से भरे हो।वहॉं  अकाल मृत्यु न होती हो प्राणियों में रोग न होता हो किसी प्रकार का अनर्थ न हो। पूरी धरा पर एक समन्यवय और सरलता हो प्रकृति के साथ तादात्म्य ही रामराज्य है।

निर्गुणिया कबीर भी राम की बहुरिया बन कर रहना चाहते है। जब मैं जीवन के सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा था, उस वक्त यही राम मेरे भी अवलंब बने। इनके सहारे ही मैने जीवन का सबसे बड़ा काम पूरा किया।अयोध्या पर किताब लिखने का काम। हालॉंकि  अयोध्या से मेरा निजी, सांस्कृतिक, धार्मिक और भावनात्मक रिश्ता रहा है। बाप दादा वहीं के रहने वाले थे। इसलिए अयोध्या मेरे संस्कारों में है। वह मन से उतरती नही। श्रद्धा का वह स्तर है कि मेरी दादी कभी अयोध्या नही कहती थीं। उनके मुंह से हरदम “अयोध्या जी” ही निकलता था। इस निकटता में मैने राम को संस्कारों में जीया है।

हमारे राम लोकंकमंगलकारी है। ग़रीब नवाज़ है। मर्यादा पुरूषोत्तम है। ईक्ष्वाकु वंश के राजा थे। इक्ष्वाकू मनु के पुत्र थे। इनके वंश मे आगे चल कर दिलीप , रघु, अज,दशरथ और राम हुए।रघु सबसे प्रतापी थे इसलिए वंश का नाम रघुवंश चला। रघु वंश के कारण ही राम को राघव, रघुवर ,रघुनाथ भी कहा गया। महाराज दशरथ के तीन रानियॉं थी। लेकिन कोई पुत्र  नही था। इसलिए उन्होने पुत्रेष्टी यज्ञ के लिए श्रृंगमुनि को बुलाया यज्ञ के आख़िर में अग्नि से देव प्रकट हुए और दशरथ को खीर भेंट की। दशरथ ने खीर अपनी रानियों को खिलाया। आधी खीर कौशल्या को दिया आधी कैकेयी को दोनों ने अपने अपने हिस्से की आधी खीर सुमित्रा को दी। नतीजतन कौशल्या ने राम को जन्म दिया कैकेयी ने भरत को। सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न दो जुड़वाँ बच्चे पैदा हुए। यही राम के होने की कहानी है।

राम का आदर्श, लक्ष्मण रेखा की मर्यादा है। लांघी तो अनर्थ। सीमा में रहे तो खुशहाल और सुरक्षित जीवन। राम जाति वर्ग से परे है। नर, वानर, आदिवासी, पशु, मानव, दानव सभी से उनका करीबी रिश्ता है। अगड़े पिछड़े से ऊपर निषादराज हों या सुग्रीव, शबरी हों या जटायु, सभी को साथ ले चलने वाले वे अकेले देवता हैं। भरत के लिए आदर्श भाई। हनुमान के लिए स्वामी। प्रजा के लिए नीतिकुशल न्यायप्रिय राजा हैं। परिवार नाम की संस्था में उन्होंने नए संस्कार जोड़े। पति पत्नी के प्रेम की नई परिभाषा दी। ऐसे वक्त जब खुद उनके पिता ने तीन विवाह किए थे। पर राम ने अपनी दृष्टि सिर्फ एक महिला तक सीमित रखी। उस निगाह से किसी दूसरी महिला को कभी देखा नहीं। जब सीता का अपहरण हुआ वे व्याकुल थे। रो-रो कर पेड़, पौधे, पहाड़ से उनका पता पूछ रहे थे। इससे उलट जब कृष्ण धरती पर आए तो उनकी प्रेमिकाएं असंख्य थी। सिर्फ एक रात में सोलह हजार गोपिकाओं के साथ उन्होंने रास किया था। फिर पिता की अटपटी आज्ञा का पालन कर उन्होंने पिता पुत्र के सम्बन्धों को नई ऊंचाई दी।

बेशुमार ताकत से अहंकार का एक खास रिश्ता हो जाता है। पर उनमें अंहकार छू तक नही गया था। यही वजह है कि  अपार शक्ति के बावजूद राम मनमाने फैसले नहीं लेते थे। वे लोकतांत्रिक हैं। सामूहिकता को समर्पित विधान की मर्यादा जानते हैं। धर्म और व्यवहार की मर्यादा भी और परिवार का बंधन भी। नर हो या वानर इन सबके प्रति वे अपने कर्तव्यबोध पर सजग रहते हैं। वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं- परहित सरिस धर्म नहीं भाई। डॉ. लोहिया कहते हैं “जब कभी गांधी ने किसी का नाम लिया तो राम का ही क्यों लिया? कृष्ण और शिव का भी ले सकते थे। दरअसल राम देश की एकता के प्रतीक हैं। गांधी राम के जरिए  हिन्दुस्तान के सामने एक मर्यादित तस्वीर रखते थे।” वे उस राम राज्य के हिमायती थे। जहां लोकहित सर्वोपरि था। जो गरीब नवाज था। तुलसी कहते हैं- “मणि मानिक महंगे किये, सहजे तृण जल नाज। तुलसी सोई जानिए, राम गरीब नवाज।” इसीलिए लोहिया भारत मां से मांगते हैं- “हे भारत माता हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का हृदय दो, राम का कर्म और वचन दो”। लोहिया जी अनीश्वरवादी थे। पर धर्म और ईश्वर पर उनकी सोच मौलिक थी।

राम साध्य है, साधन नहीं।गांधी का राम सनातन, अजन्मा और अद्वितीय है। वह दशरथ का पुत्र और अयोध्या का राजा नहीं है। जो आत्मशक्ति का उपासक प्रबल संकल्प का प्रतीक है। वह निर्बल का एक मात्र सहारा है। उसकी कसौटी प्रजा का सुख है। यह लोकमंगलकारी कसौटी आज की सत्ता पर हथौड़े सा चोट करती है- जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृपु अवस नरक अधिकारी। वे सबको आगे बढ़ने की प्रेरणा और ताकत देता है। हनुमान, सुग्रीव, जाम्बवंत, नल, नील सभी को समय-समय पर नेतृत्व का अधिकार उन्होंने दिया। उनका जीवन बिना हड़पे हुए फलने की कहानी है। वह देश में शक्ति का सिर्फ एक केन्द्र बनाना चाहते है। देश में इसके पहले शक्ति और प्रभुत्व के दो प्रतिस्पर्धी केन्द्र थे। अयोध्या और लंका। राम अयोध्या से लंका गए। रास्ते में अनेक राज्य जीते। राम ने उनका राज्य नहीं हड़पा। उनकी जीत शालीन थी। जीते राज्यों को जैसे का तैसा रहने दिया। अल्लामा इकबाल कहते हैं- “है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज, अहले नजर समझते हैं, उसको इमाम-ए-हिन्द।”

राम का जीवन बिल्कुल मानवीय ढंग से बीता। उनके यहां दूसरे देवताओं की तरह किसी चमत्कार की गुन्जाइश नहीं है। आम आदमी की मुश्किल उनकी मुश्किल है। लूट, डकैती, अपहरण और भाइयों से सत्ता से बेदखली के शिकार होते हैं। जिन समस्याओं से आज का आम आदमी जूझ रहा है। कृष्ण और शिव हर क्षण चमत्कार करते हैं। राम की पत्नी का अपहरण हुआ तो उसे वापस पाने के लिए अपनी गोल बनाई। लंका जाना हुआ तो उनकी सेना एक-एक पत्थर जोड़ पुल बनाती है। वे कुशल प्रबन्धक हैं। उनमें संगठन की अद्भुत क्षमता है। जब दोनों भाई अयोध्या से चले तो महज तीन लोग थे। जब लौटे तो एक पूरी सेना के साथ। एक साम्राज्य का निर्माण कर। राम कायदे कानून से बंधे हैं। उससे बाहर नहीं जाते। एक धोबी ने जब अपहृत सीता पर टिप्पणी की तो वे बेबस हो गए। भले ही उसमें आरोप बेदम थे। पर वे इस आरोप का निवारण उसी नियम से करते हैं। जो आम जन पर लागू है। वे चाहते तो नियम बदल सकते थे। संविधान संशोधन कर सकते थे। पर उन्होंने नियम कानून का पालन किया। सीता का परित्याग किया। जो उनके चरित्र पर धब्बा है। तो मर्यादा पुरुषोत्तम क्या करते? उनके सामने एक दूसरा रास्ता भी था, सत्ता छोड़ सीता के साथ चले जाते। लेकिन जनता(प्रजा) के प्रति उनकी जवाबदेही थी। इसलिए इस रास्ते पर वे नहीं गए।

राम अगम हैं। संसार के कण-कण में विराजते हैं। सगुण भी हैं निर्गुण भी। कबीर कहते हैं निर्गुण राम जपहुं रे भाई। मैथलीशरण गुप्त मानते हैं कि राम तुम्हारा चरित्र स्वंय ही काव्य है। कोई कवि बन जाय सहज सम्भाव्य है। यह राम से ही सम्भव है कि मैथली शरण गुप्त जैसा सामान्य कवि भी राष्ट्र कवि बन जाता है।

मान्यता है कि सबसे पहले  राम की कथा भगवान शंकर ने देवी पार्वती को सुनाई थी। उस कथा को वहॉं मौजूद एक कौवे ने भी सुन लिया। उसी कौवे का पुनर्जन्म कागभुशुण्डि के रूप में हुआ। काकभुशुण्डि को पूर्व जन्म में शंकर के मुख से सुनी वह रामकथा पूरी याद थी। उन्होंने यह कथा अपने शिष्यों को सुनाई।तुलसी अपने रामचरितमानस में इसका जिक्र करते  है।

बाद में यही कथा  ‘अध्यात्म रामायण’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। हालांकि रामकथा के बारे में एक और मत प्रचलित है जिसके मुताबिक़ सबसे पहले रामकथा  हनुमानजी ने लिखी  ‘हनुमन्नाटक’।  उसके बाद  महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत महाकाव्य ‘रामायण’ की रचना की। ‘हनुमन्नाटक’ को हनुमानजी ने एक शिला पर लिखा था। मान्यता है कि जब वाल्मीकि ने अपनी रामायण तैयार कर ली तो उन्हें लगा कि हनुमानजी के हनुमन्नाटक के सामने यह टिक नहीं पाएगी और इसे कोई नहीं पढ़ेगा। हनुमानजी को जब महर्षि की इस व्यथा का पता चला तो उन्होंने उन्हें बहुत सांत्वना दी और अपनी रामकथा वाली शिला उठाकर समुद्र में फेंक दी, जिससे लोग केवल वाल्मीकिजी की रामायण ही पढ़ें और उसी की प्रशंसा करें। समुद्र में फेंकी गई हनुमानजी की रामकथा वाली शिला राजा भोज के समय में निकाली गयी।

भगवान  राम के बारे में आधिकारिक रूप से जानने का मूल स्रोत महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण है। हलॉंकि पुराणों  में भी रामकथा का उल्लेख मिलता है। वामन, वाराह, नारदीय ,लिंग ,अग्नि ,बर्ह्मवैवर्त ,पद्म ,स्कन्द, गरूण पुराण में रामकथा के प्रसंग है। रामायण संस्कृत साहित्य का आरम्भिक महाकाव्य है यह  अनुष्टुप छन्दों में  लिखा गया  है।

महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ माना जाता है और इसीलिए यह महाकाव्य ‘आदिकाव्य’ माना गया। इस ग्रंथ में 24 हजार श्लोक, 500 उपखंड, तथा 7 काण्ड है। इसके रचना काल के बारे में अनेक मत है। कामिल बुल्के इसके रचनाकाल को छ सौ ईसा पूर्व मानते है। आठवीं शताब्दी में संस्कृत के महान कवि और नाटककार भवभूति हुए। उनका किताब उत्तर रामचरित राम के राज्याभिषेक के बाद की कथा ज्यादा प्रभावशाली ढंग से कहती है।

लोक में सबसे ज्यादा व्याप्ति तुलसी की राम चरित मानस की है। तुलसी ने लोकभाषा में रामकथा का बखान कर इसे लोक तक पहुँचाया। पन्द्रहवीं शती में लिखे इस ग्रन्थ कि बड़ा हिस्सा बनारस में लिखा गया है। 7 काण्डों में बँटे रामचरितमानस  किया है। छन्दों की संख्या के अनुसार बालकाण्ड और किष्किन्धाकाण्ड क्रमशः सबसे बड़े और छोटे काण्ड है । मध्यकाल में जब हिन्दू धर्म के उपर अनेक तरह के संकट थे। वेद शास्त्रों का अध्ययन कम हो गया था। तो इस ग्रन्थ ने समूचे हिन्दू समाज में नए जीवन का संचार किया था। तुलसी दास ने इसे आम लोगो तक पहुँचाने के लिए रामलीलाए भी कराई।रामचरितमानस पर प्रत्येक हिंदू की अनन्य आस्था है और इसे हिन्दुओं का पवित्र ग्रन्थ माना जाता है।

संस्कृत में रामकथा पर कालिदास का रघुवंश महाकाव्य भी  है। इस महाकाव्य में 19 सर्गों में रघु के कुल में उत्पन्न बीस राजाओं का इक्कीस प्रकार के छन्दों का प्रयोग करते हुए वर्णन किया गया है। इसमें दिलीप, रघु, दशरथ, राम, कुश और अतिथि का विशेष वर्णन किया गया है। वे सभी समाज में आदर्श स्थापित करने में सफल हुए। राम का इसमें विषद वर्णन किया गया है। 19 में से छः सर्ग उनसे ही संबन्धित हैं।

बंगाल की कृतिवास रामायण और तमिल की कंब रामायण भारतीय भाषाओं में रामकथा की सर्वोत्कृष्ट कृति है। तेलगू में बारहवी शताब्दी में लिखी रंगनाथ रामायण मलयालम की भास्कर रामायण, मोल्लारामायण प्रसिद्ध है। गुजराती असमिया उड़िया और मराठी में में भी रामकथा पर ग्रन्थ लिखे गए। नेपाली की अपना रामायण घर घर में है। बौद्ध ग्रन्थों में भी इसका पर्याप्त उल्लेख है।बौध्दो ने बोधिसत्व के रूप में और जैनियों ने आठवें बलदेव के रूप में राम को अपने यहॉं स्थान दिया है। उनकी जातक कथाओं में राम कथा के अलग अलग सन्दर्भ है। पर बौद्ध धर्म सनातन धर्म के ख़िलाफ़ पैदा हुआ था इसलिए उसमें रामकथा के बिगड़े सन्दर्भ  है। जैसे दशरथ जातक में तो सीता को राम की बहन बताया गया है।

भारत के बाहर भी रामकथा का विस्तार व्यापक रहा है। रामायण के अध्येता फ़ादर कामिल बुल्के ने रामायण के तीन सौ आख्यानों की चर्चा की है। थाईलैंड की रामकथा रामकियेन के नाम से जानी जाती है। जबकि इंडोनेशिया में रामायण काकावी के नाम से प्रसिद्ध है। कंबोडिया में रामकेर तो बर्मा (म्यांमार) में रामवत्थु। तुर्की में रवोतानी रामायण, लाओस में फ्रलक-फ्रलाम (रामजातक)। और फिलिपींस में  मसलादिया लाबन नाम से रामकथा का प्रचलन है। मलयेशिया में  हिकायत सेरीराम ,श्रीलंका में  जानकी-हरण, नेपाल में भानुभक्त कृत रामाजान ,जापानमें होबुत्सुशू  रामकथा पर आधारित ग्रन्थ है।  चीनी साहित्य में राम कथा पर आधारित कोई मौलिक रचना नहीं हैं। लेकिन बौद्ध धर्म में त्रिपिटक के चीनी संस्करण में रामायण से संबद्ध दो रचनाएँ मिलती हैं। ‘अनामकं जातकम्’ और ‘दशरथ कथानम्’। इससे चीन में भी इस कथा की व्याप्ति का पता चलता है।

इस संपूर्ण विश्व में राम सा चरित्र दूसरा नही। न कहीं राम सी मर्यादा है, न राम सा पौरूष और न ही राम सी तितिक्षा। राम इस दुनिया का संतुलन हैं। अमीरों की माया है तो गरीबों के राम हैं। उनका नाम भर ही दुनिया भर के गरीब-ग़ुरबों के भीतर जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों से टकराने का हौसला है। वे इस पृथ्वी पर त्रेतायुग में जन्मे, फिर यहीं के होकर रह गए। भक्तों के मोह में उन्होंने जीवन-मरण के चक्र को भी तोड़ डाला। आज भी सच्चे दिल से पुकारते ही दौड़े चले आते हैं। देश के हर रामभक्त के पास उसके हिस्से की कहानियां हैं। राम कब कब और किन किन परिस्थितियों में उसकी मदद के लिए आए, उसकी ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है। राम के आगे विज्ञान का संसार बौना है। चिकित्सा शास्त्र और रसायन शास्त्र के सूत्र अधूरे हैं। ये सब बाहरी आँखों से दीखते हैं। पर राम अंर्तमन के हैं। भाव जगत की लगन के हैं। जीवन की सृष्टि के, सृष्टि के जीवन के हैं। राम जन जन के हैं।

ADVERTISEMENT
Previous Post

असली सवाल पाकिस्तान के भविष्य का

Next Post

जब तक इन गरीब, मज़दूरों को उनका हक नही मिल जाता तब तक रेहड़ी पटरी के लिए स्वराज इंडिया का संघर्ष जारी रहेगा

Next Post
जब तक इन गरीब, मज़दूरों को उनका हक नही मिल जाता तब तक रेहड़ी पटरी के लिए स्वराज इंडिया का संघर्ष जारी रहेगा

जब तक इन गरीब, मज़दूरों को उनका हक नही मिल जाता तब तक रेहड़ी पटरी के लिए स्वराज इंडिया का संघर्ष जारी रहेगा

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 24, 2024

पहले चरण का फीडबैक बीजेपी के लिए चिंता का सबब | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 23, 2024
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

अप्रैल 21, 2024

Our channel

https://www.youtube.com/watch?v=QnB3waJ7Awg
  • Trending
  • Comments
  • Latest
50 मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी, जिनके साथ इतिहास ने किया धोखा !

50 मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी, जिनके साथ इतिहास ने किया धोखा !

अगस्त 15, 2018
बिना कपड़े के लड़की से मालिश करवाते हुए दिखे स्वामी चिन्मयानंद, वीडियो वायरल

बिना कपड़े के लड़की से मालिश करवाते हुए दिखे स्वामी चिन्मयानंद, वीडियो वायरल

सितम्बर 11, 2019
सांसद संघमित्रा मौर्य ने पति डॉ. नवल किशोर शाक्य से ली तलाक

सांसद संघमित्रा मौर्य ने पति डॉ. नवल किशोर शाक्य से ली तलाक

मार्च 2, 2021
इमरान प्रतापगढ़ी के पहल पर झारखंड सरकार ने ड्राफ्ट किया मॉब लिंचिंग कानून 

इमरान प्रतापगढ़ी के पहल पर झारखंड सरकार ने ड्राफ्ट किया मॉब लिंचिंग कानून 

दिसम्बर 14, 2021
मोदी सरकार अपने चहेते उद्यगपतियों के लिए एक लाख करोड़ बैंकों में डाल रही है!

आज़ादी के बाद से अयोध्या का इतिहास झूठ से रचा गया है: रवीश कुमार

528
महिला को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में 360 लोगों पर केस, 15 गिरफ्तार : बिहार

महिला को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में 360 लोगों पर केस, 15 गिरफ्तार : बिहार

13
ईलाज कराकर लंदन से वापस लौटे अभिनेता इरफान खान

ईलाज कराकर लंदन से वापस लौटे अभिनेता इरफान खान

11
काले हिरण मामले में 5 साल की सजा के बाद सलमान खान को मिली विदेश जाने की इजाजत

काले हिरण मामले में 5 साल की सजा के बाद सलमान खान को मिली विदेश जाने की इजाजत

10
जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 24, 2024

पहले चरण का फीडबैक बीजेपी के लिए चिंता का सबब | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 23, 2024
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

अप्रैल 21, 2024
जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 17, 2024
Currently Playing

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized

पहले चरण का फीडबैक बीजेपी के लिए चिंता का सबब | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

Uncategorized
जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized
क्या राजस्थान के सीकर लोकसभा सीट से कॉमरेड अमराराम की होगी जीत | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

क्या राजस्थान के सीकर लोकसभा सीट से कॉमरेड अमराराम की होगी जीत | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized

टैग्स

#aamAadmiParty (21) #AamAdmiParty (28) #AAP (39) #adeshGupta (15) #BjpDelhi (38) #BJP Government (127) #BOLLYWOOD (40) #Congress (123) #Covid19 (14) #delhi (203) #delhinews (17) #JamiaMilliaIslamia (19) #KEJRIVAL (16) #kisan andolan (18) #Maharashtra (42) #modi (62) #mumbai (21) #newstoday (33) #PM Modi (115) #PriyankaGandhivadra #CongressParty #RahulGandhi (25) #Rahul Gandhi (39) #yogi (13) AMERICA (14) Amit Shah (18) ARVIND KEJRIVAL (41) Bihar (46) BJP (165) coronavirus (156) Hindi News (447) India (418) Kejriwal (20) Politics (47) Ravish Kumar (15) RSS (26) Supreme Court (16) Uttar Pradesh (55) Yogi Adityanath (47) Yogi Govt (16) अखिलेश यादव (20) अमित शाह (13) उत्तर प्रदेश (95) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (15) बीजेपी (19) भाजपा (23) राहुल गांधी (17)

हमारे बारे में

विजन मुस्लिम आज वर्तमान में एक राजनीतिक पत्रिका और एम टी मीडिया वेंचर्स के एक पोर्टल, वैश्विक समाचार और हमारे अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू प्रकाशनों में मौजूदा मामलों के साथ काम कर रहा है।

श्रेणियां

  • Uncategorized (125)
  • अन्य विषय (70)
  • अर्थव्यवस्था (53)
  • इतिहास (13)
  • खेल (531)
  • देश (4,002)
  • प्रौद्योगिकी (17)
  • फैक्ट चेक (2)
  • भारतीय (3,704)
  • भारतीय मुस्लिम (189)
  • मनोरंजन (247)
  • मुद्दे (182)
  • मुस्लिम दुनिया (142)
  • राजनीति (4,111)
  • विदेश (321)
  • वीडियो (4)
  • शिक्षा (44)
  • संपादकीय (84)
  • संस्कृति (9)
  • साक्षात्कार (12)
  • सिनेमा (67)
  • स्तंभ (174)
  • इंग्लिश
  • उर्दू
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
  • करियर
  • विज्ञापन
  • गोपनीयता नीति
  • इंग्लिश
  • उर्दू
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
  • करियर
  • विज्ञापन
  • गोपनीयता नीति

© 2021 Muslim Today

No Result
View All Result
  • मुख्य पृष्ठ
  • भारतीय
  • विदेश
  • संपादकीय
  • साक्षात्कार
  • खेल
  • अर्थव्यवस्था
  • फैक्ट चेक
  • शिक्षा
  • सिनेमा

© 2021 Muslim Today

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist