शनिवार, मार्च 7, 2026
  • इंग्लिश
  • उर्दू
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
  • करियर
  • विज्ञापन
  • गोपनीयता नीति
इंग्लिश
उर्दू
विज़न मुस्लिम टुडे
  • मुख्य पृष्ठ
  • भारतीय
  • विदेश
  • संपादकीय
  • साक्षात्कार
  • खेल
  • अर्थव्यवस्था
  • फैक्ट चेक
  • शिक्षा
  • सिनेमा
No Result
View All Result
  • मुख्य पृष्ठ
  • भारतीय
  • विदेश
  • संपादकीय
  • साक्षात्कार
  • खेल
  • अर्थव्यवस्था
  • फैक्ट चेक
  • शिक्षा
  • सिनेमा
No Result
View All Result
विज़न मुस्लिम टुडे
No Result
View All Result
Home देश

मनरेगा में जाति और मनुवादी एडवाइजरी : संजय पराते

मुस्लिम टुडे by मुस्लिम टुडे
जून 16, 2021
in देश, भारतीय, राजनीति
0 0
0
मनरेगा में जाति और मनुवादी एडवाइजरी : संजय पराते
0
SHARES
27
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

इस वर्ष के अप्रैल माह में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में मनरेगा में काम करने वाले दलित व आदिवासी समुदाय से जुड़े मजदूरों के लिए भुगतान का संकट खड़ा हो गया, जबकि बाकी मजदूरों को भुगतान पहले की तरह ही हो रहा था.

पूरे देश में हल्ला मचने के बाद यह पता चला कि यह अव्यवस्था नरेंद्र तोमर के अधीन ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक ऐसी एडवाइजरी के कारण पैदा हुई है, जिसके बारे में कोई चर्चा सार्वजनिक रूप से नहीं गयी थी और न ही इस एडवाइजरी पर संसद में तो दूर, इस मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति तक में कोई चर्चा हुई थी.

मंत्रालय के अधिकारी भी इस एडवाइजरी से अनजान थे और ‘वायर’ की रिपोर्ट के अनुसार भुगतान संकट का हंगामा मचने पर मंत्रालय की वेबसाइट से इस एडवाइजरी को चुपचाप हटा लिया गया है.

ADVERTISEMENT

एडवाइजरी यह है कि अब इस वित्त वर्ष से अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लिए मनरेगा फंड का आवंटन व भुगतान अलग से किया जाएगा, इस एडवाइजरी के कारण राज्यों के लिए नामित डीडीओ का काम इतना अधिक बढ़ गया है कि वर्कलोड दुगुना होने के कारण उसे एफटीओ पर अपने हस्ताक्षर करने के लिए समय कम पड़ने लगा है.

भुगतान के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये आने के बावजूद बैंक भी नए एससी/एसटी खातों के लिए पीएफएमएस मैपिंग का काम समय पर न कर पाने के कारण भुगतान करने में असमर्थ थे.

इस एडवाइजरी की जरूरत क्या है? एडवाइजरी इस पर चुप है, लेकिन यह प्रचारित किया जा रहा है कि ऐसा आदिवासी व दलित मजदूरों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए क्या वाकई मजदूरों का भुगतान अलग-अलग श्रेणियों में करने की जरूरत है? क्या यह मनरेगा की मूल मंशा के खिलाफ नहीं है?

केंद्र सरकार की ही रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में मनरेगा में काम करने वालों में 50% से ज्यादा महिलाएं और 40% से ज्यादा दलित और आदिवासी तबकों से जुड़े मजदूर हैं, केंद्र सरकार को यह सामाजिक वर्गीकरण कैसे मिला?

इसलिए कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के सामाजिक वर्गीकरण का रिकॉर्ड पहले से रखा जा रहा है और इसका पता करने के लिए मजदूरी भुगतान को श्रेणीकरण से जोड़ना जरूरी नहीं है, तो फिर श्रेणीकृत भुगतान के पीछे वास्तविक मंशा क्या हो सकती है?

वास्तव में भाजपा मनरेगा के पक्ष में कभी नहीं रही तथा इस कानून का ‘मिट्टी-कुदाली वाले अधकचरे काम’ के रूप में उपहास उड़ाती रही है, लेकिन सामाजिक अध्ययन यह बताते हैं कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को आर्थिक रूप से सशक्त किया है और इससे उनकी सामूहिक सौदेबाजी की ताकत बढ़ी है.

मनरेगा मजदूरों की आय में 10% की वृद्धि हुई है और इस बढ़ी हुई आर्थिक ताकत के कारण अब वे गांवों के प्रभुत्वशाली तबकों के यहां बेगारी या कम मजदूरी पर काम करने से इंकार करते हैं, भाजपा की असली दिक्कत यही है कि ग्रामीण गरीब, विशेषकर इन कामों में लगे हुए पद दलितों की आर्थिक ताकत बढ़ रही है, यह ताकत जितनी बढ़ेगी, गांवों के सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक और सांस्कृतिक जीवन पर कब्जा जमाए हुए इस प्रभुत्वशाली वर्ग की ताकत को उतनी ही ज्यादा चुनौती भी मिलेगी और उसी अनुपात में वे कमजोर भी होंगे.

इसीलिए भाजपा इस सार्वभौमिक रोजगार गारंटी कानून को, जो बिना किसी जातीय-धार्मिक भेदभाव के, काम चाहने वाले किसी भी ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की गारंटी करता है, को कमजोर करना चाहती है तथा वह इस मांग आधारित सार्वभौमिक रोजगार गारंटी कानून को,

आवंटन आधारित सीमित रोजगार योजना में तब्दील करना चाहती है– यदि फंड का आवंटन नहीं, तो काम भी नहीं, इसका सीधा असर दलित-आदिवासी समुदाय से जुड़े लोगों के रोजगार पर पड़ेगा, जिसे बताया जाएगा कि चूंकि फंड ही नहीं है या नहीं आया है, तो काम कैसे दिया जा सकता है? इसलिए ये एडवाइजरी मनरेगा की मूल संकल्पना के ही खिलाफ है.

ऐसा होने की संभावना इसलिए भी बढ़ जाती है कि आज भी हमारे ग्रामीण समाज व पंचायतों पर ऊंची जातियों का ही प्रभुत्व है, यह प्रभुता मनरेगा के सार्वभौमिक रोजगार कार्यक्रम होने के बावजूद इस समुदाय के लोगों को गैर-कानूनी तरीके से काम से वंचित रखती है, समाज में व्याप्त जातिगत असमानता के विषाणु इस रोजगार गारंटी कानून को भी दूषित कर रहे हैं.

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के नितिन धाकतोड़े ने वर्ष 2017-18 में तेलंगाना में इस संबंध में एक अध्ययन किया है, अपनी रिपोर्ट ‘कास्ट इन मनरेगा वर्क्स एंड सोशल ऑडिट’ में वे बताते हैं कि हालांकि सरकार द्वारा मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी 202 रुपये प्रतिदिन है.

लेकिन पिछड़ा वर्ग मजदूरों को औसतन 172 रुपये, अनुसूचित जाति के मजदूरों को 155 रुपये तथा धार्मिक अल्पसंख्यक मजदूरों को औसतन केवल 123 रुपये प्रतिदिन ही मजदूरी मिली, तेलंगाना के बाथ मंडल की सोनाला पंचायत में मजदूरों को औसतन केवल 153 रुपये प्रतिदिन ही मजदूरी मिली और कुछ मजदूरों को तो केवल 86 रुपये ही मजदूरी मिली, समाज के जातिक्रम में जो जितना नीचे था, वह मजदूरी से उतना ही ज्यादा वंचित था.

साफ है कि यह रिपोर्ट पंचायतों में जातीय प्रभाव को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है, लेकिन यह वंचना किसी राज्य के किसी पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार पूरे देश के सभी पंचायतों तक है.

प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज के अध्ययन के अनुसार झारखंड राज्य में मनरेगा कार्यों में एसटी-एससी समुदाय के लोगों की भागीदारी लगातार घट रही है, वर्ष 2015-16 में इन दोनों समुदायों की भागीदारी 51.20% थी, जो घटकर वर्ष 2019-20 में महज 35.79% रह गई, मोदी सरकार की यह एडवाइजरी और फंड आवंटन नीति इस वंचना को और बढ़ाएगी,

दलित मानवाधिकारों पर राष्ट्रीय अभियान के विश्लेषण के अनुसार अनुसूचित जाति के लिए वर्ष 2014-19 के बीच सरकारी खर्च केवल 3.1 लाख करोड़ रुपये ही था, जबकि इस समुदाय के लिए कुल 6.2 लाख करोड़ रुपये ही आवंटित किये गए थे, इसी प्रकार, इसी समयावधि के लिए अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटित 3.28 लाख करोड़ रुपयों के विरुद्ध केवल 2 लाख करोड़ रुपये ही खर्च किये गए.

यह है केंद्रीय स्तर पर अजा-जजा उपयोजना की स्थिति! इसलिए यह दावा कि यह एडवाइजरी दलित-आदिवासी समुदाय के हित में है, बेहद बचकाना है, आशंका यही ज्यादा है कि श्रेणीगत आवंटन के बाद फंड की कमी का रोना रोकर या फिर जान-बूझकर गैर-कानूनी तरीके से इन तबकों के मजदूरों को रोजगार से वंचित करने का खेल खेला जाएगा.

पिछले वर्ष मोदी सरकार को मनरेगा के लिए 1,11,500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े, कोरोना महामारी और इसके कारण गांवों में अपने घर वापस पहुंचे करोड़ों अतिरिक्त लोगों को काम देने की जरूरत होने के बावजूद इस वित्त वर्ष में केवल 73000 करोड़ रुपये ही आवंटित किये गए हैं.

आज भी जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम 100 दिनों की जगह औसतन केवल 46 दिन ही काम मिल रहा है, ऐसे में श्रेणीकृत आवंटन इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा और किस श्रेणी के मजदूर को काम मिलेगा, यह इस बात से तय होगा कि किस श्रेणी के लिए फंड का आवंटन है.

यह भारत के ग्रामीण समाज में जातिगत असमानता को बढ़ाएगा तथा यह इस कानून की आधारभूत संकल्पना — सार्वभौमिक रोजगार गारंटी — के भी खिलाफ है, लेकिन मोदी सरकार तो ऐसा ही चाहती है, जो हिन्दू राष्ट्र के निर्माण के लिए एक छोटा-सा मनुवादी कदम ही है, इस एडवाइजरी से आगे अब मनरेगा की विदाई का ही रास्ता खुलता है– कानूनन न सही, लेकिन व्यवहारिक रूप से ही, इसके बाद रोजगार गारंटी कानून सवर्णों के नियंत्रण से ही संचालित होगा और दलित-आदिवासी समुदायों के लिए न रहेगा फंड, न मिलेगा रोजगार!

(लेखक छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष हैं)

 

Previous Post

ICC Test Rankings : स्टीव स्मिथ फिर बने नंबर 1, जानिए केन विलियमसन की रैंकिंग

Next Post

किसान आंदोलन का 202वां दिन : बीजेपी कार्यालय की नींव उखाड़ने के मामले में किसानाें के घर छापे

Next Post
किसान आंदोलन का 202वां दिन : बीजेपी कार्यालय की नींव उखाड़ने के मामले में किसानाें के घर छापे

किसान आंदोलन का 202वां दिन : बीजेपी कार्यालय की नींव उखाड़ने के मामले में किसानाें के घर छापे

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 24, 2024

पहले चरण का फीडबैक बीजेपी के लिए चिंता का सबब | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 23, 2024
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

अप्रैल 21, 2024

Our channel

https://www.youtube.com/watch?v=QnB3waJ7Awg
  • Trending
  • Comments
  • Latest
50 मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी, जिनके साथ इतिहास ने किया धोखा !

50 मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी, जिनके साथ इतिहास ने किया धोखा !

अगस्त 15, 2018
बिना कपड़े के लड़की से मालिश करवाते हुए दिखे स्वामी चिन्मयानंद, वीडियो वायरल

बिना कपड़े के लड़की से मालिश करवाते हुए दिखे स्वामी चिन्मयानंद, वीडियो वायरल

सितम्बर 11, 2019
सांसद संघमित्रा मौर्य ने पति डॉ. नवल किशोर शाक्य से ली तलाक

सांसद संघमित्रा मौर्य ने पति डॉ. नवल किशोर शाक्य से ली तलाक

मार्च 2, 2021
इमरान प्रतापगढ़ी के पहल पर झारखंड सरकार ने ड्राफ्ट किया मॉब लिंचिंग कानून 

इमरान प्रतापगढ़ी के पहल पर झारखंड सरकार ने ड्राफ्ट किया मॉब लिंचिंग कानून 

दिसम्बर 14, 2021
मोदी सरकार अपने चहेते उद्यगपतियों के लिए एक लाख करोड़ बैंकों में डाल रही है!

आज़ादी के बाद से अयोध्या का इतिहास झूठ से रचा गया है: रवीश कुमार

528
महिला को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में 360 लोगों पर केस, 15 गिरफ्तार : बिहार

महिला को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में 360 लोगों पर केस, 15 गिरफ्तार : बिहार

13
ईलाज कराकर लंदन से वापस लौटे अभिनेता इरफान खान

ईलाज कराकर लंदन से वापस लौटे अभिनेता इरफान खान

11
काले हिरण मामले में 5 साल की सजा के बाद सलमान खान को मिली विदेश जाने की इजाजत

काले हिरण मामले में 5 साल की सजा के बाद सलमान खान को मिली विदेश जाने की इजाजत

10
जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 24, 2024

पहले चरण का फीडबैक बीजेपी के लिए चिंता का सबब | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 23, 2024
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

अप्रैल 21, 2024
जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

अप्रैल 17, 2024
Currently Playing

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जौनपुर के त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मारेगा बाजी? | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized

पहले चरण का फीडबैक बीजेपी के लिए चिंता का सबब | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का साइलेंट होना, बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है

Uncategorized
जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

जामिया की नौशीन ने UPSC में नौवां स्थान प्राप्त किया | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized
क्या राजस्थान के सीकर लोकसभा सीट से कॉमरेड अमराराम की होगी जीत | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

क्या राजस्थान के सीकर लोकसभा सीट से कॉमरेड अमराराम की होगी जीत | आग़ा खुर्शीद खान। मुस्लिम टुडे

Uncategorized

टैग्स

#aamAadmiParty (21) #AamAdmiParty (28) #AAP (39) #adeshGupta (15) #BjpDelhi (38) #BJP Government (127) #BOLLYWOOD (40) #Congress (123) #Covid19 (14) #delhi (203) #delhinews (17) #JamiaMilliaIslamia (19) #KEJRIVAL (16) #kisan andolan (18) #Maharashtra (42) #modi (62) #mumbai (21) #newstoday (33) #PM Modi (115) #PriyankaGandhivadra #CongressParty #RahulGandhi (25) #Rahul Gandhi (39) #yogi (13) AMERICA (14) Amit Shah (18) ARVIND KEJRIVAL (41) Bihar (46) BJP (165) coronavirus (156) Hindi News (447) India (418) Kejriwal (20) Politics (47) Ravish Kumar (15) RSS (26) Supreme Court (16) Uttar Pradesh (55) Yogi Adityanath (47) Yogi Govt (16) अखिलेश यादव (20) अमित शाह (13) उत्तर प्रदेश (95) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (15) बीजेपी (19) भाजपा (23) राहुल गांधी (17)

हमारे बारे में

विजन मुस्लिम आज वर्तमान में एक राजनीतिक पत्रिका और एम टी मीडिया वेंचर्स के एक पोर्टल, वैश्विक समाचार और हमारे अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू प्रकाशनों में मौजूदा मामलों के साथ काम कर रहा है।

श्रेणियां

  • Uncategorized (125)
  • अन्य विषय (70)
  • अर्थव्यवस्था (53)
  • इतिहास (13)
  • खेल (531)
  • देश (4,002)
  • प्रौद्योगिकी (17)
  • फैक्ट चेक (2)
  • भारतीय (3,704)
  • भारतीय मुस्लिम (189)
  • मनोरंजन (247)
  • मुद्दे (182)
  • मुस्लिम दुनिया (142)
  • राजनीति (4,111)
  • विदेश (321)
  • वीडियो (4)
  • शिक्षा (44)
  • संपादकीय (84)
  • संस्कृति (9)
  • साक्षात्कार (12)
  • सिनेमा (67)
  • स्तंभ (174)
  • इंग्लिश
  • उर्दू
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
  • करियर
  • विज्ञापन
  • गोपनीयता नीति
  • इंग्लिश
  • उर्दू
  • हमारे बारे में
  • हमसे संपर्क करें
  • करियर
  • विज्ञापन
  • गोपनीयता नीति

© 2021 Muslim Today

No Result
View All Result
  • मुख्य पृष्ठ
  • भारतीय
  • विदेश
  • संपादकीय
  • साक्षात्कार
  • खेल
  • अर्थव्यवस्था
  • फैक्ट चेक
  • शिक्षा
  • सिनेमा

© 2021 Muslim Today

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist