तैयारी तो हो चुकी है। सरकार ने आई टी एक्ट के तहत नए नियम बनाए हैं। इन नियमों के बारे में कहा जा रहा है कि आचार संहिता के नाम पर डिजिटल मीडिया का गला घोंटा जा रहा है। मीडिया को गोदी मीडिया बना देने के बाद जो भी जगह बची थी वो स्वतंत्र यू ट्यूब और अपना चैनल चलाने वालों के कारण बनी थी।
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सरकार के झूठ को चुनौती मिल रही थी। सरकार अगर अफ़वाहों और सांप्रदायिक ख़बरों को लेकर चिन्तित रहती तो उन पर कार्रवाई करती। वो ऐसा करके नहीं क्योंकि इससे उसकी राजनीति को फ़ायदा होता है। सरकार आचार संहिता के नाम पर आस्था का हथियार अपने पास रखना चाहती है।
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उसके समर्थक और नेता ख़ुद दूसरे की आस्था पर हमले करेंगे तब सरकार के ये क़ानून अनदेखा कर देंगे। आई टी सेल के ज़रिए सोशल मीडिया पर गंध फैलाने का काम किसने किया और उससे किसे लाभ हुआ सब जानते हैं। आज तलक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।













