नई दिल्ली : असम सरकार ने शुरू हुए शीतकालीन सत्र में एक बिल पेश किया है जिसमें सभी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद कर इन्हें आम शिक्षा का संस्थान बनाए जाने का प्रस्ताव है.
इसके साथ ही इस बिल में भविष्य में सरकार द्वारा कभी मदरसा या स्कूल न खोले जा सकने का भी प्रस्ताव है, शिक्षा मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने सोमवार को ये जानकारी दी.
सरमा ने कहा कि “हमने एक विधेयक पेश किया है जिसके तहत सभी मदरसों को सामान्य शिक्षा के संस्थानों में बदल दिया जाएगा और भविष्य में सरकार द्वारा कोई मदरसा स्थापित नहीं किया जाएगा.
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हम शिक्षा प्रणाली में वास्तव में धर्मनिरपेक्ष पाठ्यक्रम लाने के लिए इस विधेयक को पेश करके खुश हैं.
सरमा ने आगे कहा कि कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने इस विधेयक का विरोध किया है, लेकिन हम दृढ़ हैं कि इस विधेयक को पारित करने की आवश्यकता है और इसे पारित किया जाएगा.”
बता दें इस बिल को कुछ ही दिन पहले असम कैबिनेट ने मंजूरी दी है, इसके अलावा राज्य कैबिनेट ने एक अलग प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि निजी शिक्षण संस्थानों के अधिकारी उन्हें संचालित करने से पहले सरकार से अनुमति हासिल करें.
शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने अक्टूबर में कहा था कि असम में 610 सरकारी मदरसे हैं और सरकार इन संस्थानों पर प्रति वर्ष 260 करोड़ रुपये खर्च करती है.
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सरमा ने कहा था कि राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड असम को भंग कर दिया जाएगा, सरमा ने कहा था कि सभी सरकारी मदरसे को उच्च विद्यालयों में तब्दील कर दिया जाएगा और वर्तमान छात्रों के लिए नया नामांकन नियमित छात्रों की तरह होगा.
सरमा ने कहा था कि संस्कृत स्कूलों के ढांचे का इस्तेमाल उन्हें भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रवाद के शिक्षण एवं शोधन केंद्रों की तरह किया जाएगा.
विधानसभा के उपाध्यक्ष अमीनुल हक लश्कर ने कहा था कि निजी मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा, अमीनुल ने नवंबर में कछार जिले में एक मदरसे की आधारशिला रखते हुए कहा था, ‘इन मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा क्योंकि इन्होंने मुस्लिमों को जिंदा रखा है.












